Mahashivratri 2019

2019 की महाशिवरात्रि – शिव के अंदर छुपे है इस ब्रह्मांड के सारे रहस्य

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2019 की महाशिवरात्रि – शिव के अंदर छुपे है इस ब्रह्मांड के सारे रहस्य

उज्जैन: शिव अर्थात इस पूरे ब्रह्मांड ही नहीं अपितु इस ब्रह्मांड से परे अनंतो अनंत ब्रह्मांड के उर्जा के कारक को वेदों में शिव कहा गया है. जिसका ना ही कोई प्रारंभ है और ना ही कोई अंत. शिव एक ऐसा उर्जा केंद्र भी जो मानव के भी भीतर है और वह उसे योगशक्ति द्वारा जाग्रत कर सकता है. इसीलिए शिव को प्रथम योगी भी कहा जाता है.(2019 की महाशिवरात्रि)

फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को ही महाशिवरात्रि कहा जाता है:

वैसे तो हर माह एक एक शिवरात्रि होती है परन्तु फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को ही महाशिवरात्रि कहा जाता है.
महाशिवरात्रि से जुडी कई मान्यताए है पर कुछ महत्वपूर्ण जो है. उसमे पहली यह है कि इस दिन प्रभु शिव- माँ पार्वती का विवाह हुआ था. इसीके साथ एक और मान्यता यह भी है कि इसी दिन शिव के रूद्र रूप का अवतरण हुआ था. और यह भी माना जाता है कि इसी दिन महायोगी शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोल कर तांडव किया था.

जैसा की सभी को पता है शिवजी बैरागी और योगी है तो उनपर आप पूजा में अर्पण करे बिलपत्र, धतुरा, अबीर, बेर इत्यादी. इस बात का ध्यान रखे की बिलपत्र कही से कटा-फटा नहीं होना चाहिए.

कैसे अर्पण और अर्चना करे, भगवान् शिवजी की :

शिवरात्रि के दिन ब्रह्म महूरत में स्नानं कर स्वच्छ वस्त्र (सफ़ेद वस्त्र) , नजदीक के किसी भी शिव मंदिर चले जाये.
पूजन की विधि :

1. पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल की धारा से अभिषेक करते हुए शिव के पंचाक्षरी मन्त्र “ॐ नम: शिवाय: ” बड़े ही शांत मन से धीरे-2 जाप करे.
2. इसके बाद पंचाम्रत से शिवलिंग का अभिषेक करे इसके बाद ढूध, पानी, शहद मिला कर फिर से शिवलिंग का अभिषेक करे.
3. अब पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करे.
4. अब प्रभु शिवजी को 11 बेल पत्र अर्पण करे और साथ में इस मन्त्र का जाप करे:

|| ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

यह मन्त्र यजुर्वेद के रूद्र अध्याय में से लिया गया है इसका का मतलब होता है
त्र्यंबकम् => त्रि-नेत्रों वाला (कर्मकारक)
यजामहे => हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देय
सुगंधिम => मीठी महक वाला, सुगंधित (कर्मकारक)
पुष्टिः => एक सुपोषित स्थिति, फलने-फूलने वाली, समृद्ध जीवन की परिपूर्णता
वर्धनम् => वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है. जो हर्षित करता है, आनन्दित करता है और स्वास्थ्य प्रदान करता है.
उर्वारुकमिव => कर्मकारक जैसे, इस तरह
बन्धनात् => सारे बन्धनों से
मृत्योर्मुक्षीय => मृत्यु से हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें
अमृतात् => अमरता, मोक्ष

इस मन्त्र के लाभ :
धन और अच्छी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है, जो कार्य सोच कर यह जाप करते है उस कार्य में आने वाली बाधाये नष्ट होती है. परिवार में सुख और सम्रधि बड़ती है.

5. अब उपर वाले ही मन्त्र को दोहराते हुए धतुरा, बेर, उम्बी और थोड़ी सी भांग चड़ाए.
6. इसके बाद प्रभु शिवजी को शुद्ध फलो और मिठाई का भोग लगाये
7. इसके बाद 11 दीपमाला से प्रभु शिव के आरती करे.
8. प्रशाद को जितना हो सके लोगो में बाटें.
9. इस दिन मन को शांत रखे. किसी को अपशब्द ना बोले कम बोले और कामवासना से दूर रहे.
10. इस दिन आप फलाहार ले और शाम को भी पूजन करे.

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