Vegetarianism and Corona

शाकाहार और कोरोना

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शाकाहार और कोरोना  (Vegetarianism and Corona)

इंदौर: वैसे तो गत वर्षो में शाकाहार की उपयोगिता बहुत लोगो तक पहुंची भी है. और लोगो ने मांसाहार त्याग कर शाकाहारी बनना चालू किया है. वही अभी हम कोरोना काल की बात करे, पिछले कुछ वर्षों में चीन और अन्य एशियाई देशों ने शाकाहारी रेस्तरां की संख्या को बढ़ते हुए देखा जा सकता है.  { शाकाहार और कोरोना  (Vegetarianism and Corona) }

रिसर्च फर्म, यूरोमॉनिटर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि चीन अभी भी सूअर का मांस, बीफ और मुर्गी पालन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। लेकिन हाल के वर्षों में यहाँ पर मांग में भारी गिरावट देखी गई है।

लेकिन यह चीन में कोरोनावायरस के प्रकोप का असर यही तक नहीं था. सरकार ने जंगली जानवरों के व्यापार और खपत पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है. पिछले कुछ महीनो से, चीन की पुलिस देश भर में घर, रेस्तरां और अस्थायी बाजारों पर छापा मार रही है, लगभग 1200 लोगों को जंगली जानवरों को पकड़ने, बेचने या खाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए गिरफ्तार की गयी है.

ब्लूमबर्ग के अनुसार, चीन में गैर-पशु प्रोटीन स्रोतों का विरोध करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। “जस्ट एग”, एक सैन फ्रांसिस्को आधारित शाकाहारी अंडे का स्टार्ट-अप है जो कई देशो में अपना उत्पाद भी बेचता है। और उन्होंने नयी पीढ़ी युवा वर्ग की आबादी को धीरे-धीरे पौधे-आधारित प्रोटीन स्रोतों को खाने के लिए उपलब्ध करा रही है. इस कंपनी ने अपनी बिक्री इंडिया में भी चालू कर दी है. ऐमज़ॉन के माध्यम से.

यह मानव महामारी का पहला उदाहरण नहीं है जिसे जानवरों की उत्पत्ति से जोड़ा जा रहा है। “डब्ल्यूएचओ का कहना है कि पिछले 50 वर्षों में 70% वैश्विक बीमारी पैदा करने वाले रोगजनकों की खोज जानवरों से हुई है”, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बताया कि क्या यह अफ्रीकी सूअर का बुखार है, जिसके कारण सूअर के मांस की बिक्री में गिरावट आई या H5N1V फ्लू हुआ। , इबोला या सार्स सभी को मानव उपभोग के लिए पैदा किए गए जानवरों से जोड़ा गया है या घोषित किया गया है। और इन सभी प्रकोपों ​​के साथ, जानवरों की खपत में हमेशा तेज गिरावट आई है।

शाकाहार और कोरोना  (Vegetarianism and Corona)

भारतीय किसानो को हो सकता है बड़ा फायदा

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में 2014 में पोर्क की बिक्री 42.49 मिलियन टन से घटकर 2016 में 40.85 मिलियन टन हो गई।
उसका मुख्या कारण दो साल पहले चीन के स्वास्थ्य उद्योग द्वारा जारी एक नई आहार गाइडलाइन।

शाकाहार की बढ़ती प्रवृत्ति ने फल और सब्जियों की ओर अधिक लोगो का झुकाव देखा गया है. जैसा कि हम जानते है की भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारे यहाँ दालों, तिलहन और कई ऐसे मसालों की खेती की जाती है जोकि दुनिया में अन्य जगह मिलना मुश्किल होता है. देखा जाये तो जब कोरोना काल खत्म होगा और भारत का फॉरेन ट्रेड बढ़ेगा तब सबसे ज्यादा शाकाहार भोजन का एक्सपोर्ट की जाने की उम्मीद है.

इस साल भारत का फ़ूड फॉरेन ट्रेड लगभग 38 लाख करोड़ का रहा है जिसमे एक्सपोर्ट शाकाहरी की वस्तुओ की ट्रेड इस संख्या लगभग 36% था. जो की आने वाले समय में बढ़कर 60 – 65% तक बढ़ने की सम्भावना है जोकि हमरे किसानो के लिए एक अच्छी खबर है.

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